Friday, 14 July 2017

"हिन्दुस्तान" ( HINDUSTAN)



जो बचपन में किताबों में पढ़ाया जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

जिसे कभी सोने की चिड़िया बताया जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए।।

महापुरुषों की भूमि जिसे , ऋषिमुनियों का देश बताया ाता था,
मुझे वो हिंदुस्तान चाहिए  ।।

नहीं चाहिए ये ऊँची इमारतें ये बड़े बड़े मकान तुम्हारे ,
जहाँ लोगों को दिल में बसाया जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

दो जिस्मों का खेल बनकर रह गयी मुहोब्बत यहाँ ,
जहाँ गोपियों संग रास रचाया जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

दो गज़ ज़मीन खातिर बँट जाते है परिवार यहाँ ,
जहाँ भाई संग भाई बनवास जाया करता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

हिंदी अंग्रेजी दो पाटों में पीस रहा ये देश यहाँ ,
जहाँ माँ बोली को धर्म बताया जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

आज अपनों से अपनी आबरू का डर नारी को यहाँ ,
जहाँ नारी को देवी बनाके पूजा जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

गुरु शिष्य की क्या बात करूँ आज इस कलयुग में ,
जहाँ एकलव्य जैसा शिष्य और द्रोणा जैसा गुरु पाया जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

राम कृष्ण की क्या बात कहूं वो तो चलो भगवन है ,
जहाँ गौ और गंगा माँ को पूजा जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

किसी मज़हब की बात करना मुझे गवारा नहीं पर ,
जहाँ ईद दिवाली को मिलकर मनाया जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

माना के सोच , रीती रिवाज़ सब बदल गए "चौहान" वक़्त के साथ ,
जहाँ "भारत माता की जय" से सारा विश्व गूंज  जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।

जो बचपन में किताबों में पढ़ाया जाता था ,
मुझे वो हिन्दुस्तान चाहिए  ।।


शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की ज़ुबाँ

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