मैं हूँ सिफ़र मुझे कुछ आता नहीं है ,
पर हूँ बेफ़िक्र के मुझे कुछ आता नहीं !!
झूठ घमंड कोसों दूर हो जाते है मुझसे ,
जब बैठ के सोचता हूँ के मुझे कुछ आता नहीं !!
आता नहीं है मुझे रिश्तों में फरेब करना ,
खुश हूँ अकेला ये ज़माना मुझे भाता नहीं है !!
मतलब की दुनिया है लोगो कों सच से परहेज़ है ,
जो दूर है वो दूर रहे ,झूठे लोगों से रिश्ते "चौहान" बनता नहीं है !!
किसको क्या पता क्या खेल है खुदा का ,
जिसको बनाना खुदा चाहता है उसको मिटा कोई पता नहीं है !!
थोड़ी अदब-तहज़ीब सीख ले "चौहान " अब तो ,
भ्रम बनाये रख के सच है तुझे कुछ आता नहीं है !!
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां







