Sunday, 31 December 2017

"मुझे कुछ आता नहीं है " (MUJHE KUCH AATA NHI HAI)



मैं हूँ सिफ़र मुझे कुछ आता नहीं है ,
पर हूँ बेफ़िक्र के मुझे कुछ आता नहीं !!

झूठ घमंड कोसों दूर हो जाते है मुझसे  ,
जब बैठ के सोचता हूँ के मुझे कुछ आता नहीं !!

आता नहीं है मुझे रिश्तों में फरेब करना ,
खुश हूँ अकेला ये ज़माना मुझे भाता नहीं है !!

मतलब की दुनिया है लोगो कों सच से परहेज़ है ,
जो दूर है वो दूर रहे ,झूठे लोगों से रिश्ते "चौहान" बनता नहीं है !!

किसको क्या पता क्या खेल है खुदा का ,
जिसको बनाना खुदा चाहता है उसको मिटा कोई पता नहीं है !!

थोड़ी अदब-तहज़ीब सीख ले "चौहान " अब तो ,
भ्रम बनाये रख के सच है  तुझे कुछ आता नहीं है !!

शुभम सिंह चौहान 
मेरी कलम -  दिल की जुबां 

Thursday, 28 December 2017

"तज़ुर्बा-ए-ज़िंदगी" (TAZURBA-E-ZINDAGI)


ख़ामोशी को लबों पर सजा के रखले ,
मीठा  ज़हर है ज़ुबाँ लोगों की , खुद को बचा के रखले !!

नक़ाबपोश है यहाँ हर कोई ,इस दुनिया के बाजार में ,
दुश्मन अपने बन कर बैठे है , चेहरा तू भी छुपा कर रखले !!

वक़्त आएगा तो साहिल नसीब होंगे तेरी भी कश्ती को ,
बस तूफानों से लड़ कर लहरों की मौज में बहना सिखले !!

विश्वास ना कर यूँ राह में हर किसी मुसाफिर पे ,
रास्ते बहुत मिल जायेंगे बस तू अकेले चलना सीख ले !!

कौन छोटा है यहाँ कौन बड़ा ,ये तो वक़्त बतलायेगा ,
थोड़ा हद्दों में रहना तो "चौहान " अब तू भी सिखले !!

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की ज़ुबाँ

Friday, 22 December 2017

" ABOUT ME "


रिश्ते  बनता नहीं वो,
जिनको निभाता नहीं ,
यारी में जान कुर्बान पर,
उम्मीद  किसी से मेरी अब ज़्यादा नहीं !!

स्वार्थी लोगों से रखने  लगा  हूँ दुरी  ,
ये ज़िंदगी एक शतरंज  ,
हारु या जीतूं  कोई गम नहीं ,
बनना हैं राजा  मुझे,
इस खेल का पियादा  नहीं !!

जंग है मेरी खुद से ,
रुकना मुझे आता नहीं,
पाना है  मंज़िल को ,
चाहे वो आज मिले या फिर कल,
कठिनाइयों से भागने  का मेरा कोई इरादा नहीं!!

ख़ामोशी का चोला हूँ ओढ़  के बैठा ,
जुबानों से ठगना , ठगना मुझे आता नहीं ,
"नाथ" तेरी लगन  मे मगन  हो गया ,
"चौहान" बुरा  किसी चाहता नहीं !!

अब तुझपर  है विश्वास  कर लिया,
घमंड  मुझे तेरे साथ का है,
और मुझे कुछ आता नहीं  !!

By : shubham singh Chauhan
Meri kalam - dil ki zubaa'n

Monday, 18 December 2017

"तेरा इंतजार" (TERA INTZAAR)


जब तलक साँसें है ,तेरे इश्क़ का मुझ पर ख़ुमार रहेगा,
तुम मिलो ना मिलो बात अलग है, मुझे मरने तक तेरा इंतज़ार रहेगा!!

क्या है बेबसी क्या है ये आलम तन्हाई का तुम क्या जानो,
तेरी यादों में अब तो दिन रात युहीं जीना दुश्वार रहेगा !!

कौन करेगा तुमसे मुहोबत मेरे जितनी मेरे बाद ,
मेरे मरने तलक तुमसे ये प्यार युहीं बेशुमार रहेगा!!

दुनिया पढ़ लेती है हाव-भाव चहरे के एक वक़्त के बाद ,
तेरी खामोशियों को पढ़ने का ये सिलसिला युहीं बरक़रार रहेगा!!

कहाँ होगी फिर वो जज़्बात मेरे दिल से निकले उन अल्फ़ाज़ों में,
कहाँ फिर "चौहान" जज़्बात-ए-इश्क़ से कोई इख़्तियार  रहेगा !!

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

Sunday, 10 December 2017

"दिल की किताब" (DIL KI KITAB)


खोल किताब तेरे दिल की देख और पलट के देख कुछ पन्नो को,
धुंधलाया हुआ एक पन्ना मेरे नाम का भी होगा !!

मिटे हुए उन अक्ष्रों में कहीं कुछ बचा हुआ ,
एक अधूरा सा अक्षर मेरे नाम का भी होगा !!

खामोश लबों पर आ के ठहरा हुआ वो ,
आँखों से बहता आसूं मेरे नाम का भी होगा !!

तेरी हिफाज़त में चलता हुआ तेरे साथ ,
तेरे साए में छुपा हुआ अक्ष मेरा भी होगा !!

काली घनी रात में तेरे जहन में बसा हुआ,
एक छोटा सा ख़्याल मेरा भी होगा !!

माना के आज दूर सही हम पर पढ़ते हुए" मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ" ,
"चौहान "का एहसास करता हर एक अल्फ़ाज़ मेरे नाम का होगा !!

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

Thursday, 7 December 2017

"अंदाज़ " (ANDAAZ)


अंदाज़ अब भी वही है , तेरी बातों का ..
सिमटे हुए सहमे हुए उन जज़्बातों का ..

वो चेहरे के नूर का , इश्क़ के सुरूर का ,
तेरे अश्क़ों से भीगी हुई उन तन्हा रातों का..

दिल में उठते हर एक सवाल का , जहन में आते तेरे ख्याल का,
किसी बक्से में बंद पड़ी उन इश्क़ की सौगातों का ..

खुद से ज़्यादा मेरी फ़िक्र का , बातों में मेरे ज़िक्र का ,
चोरी छुपे होती थी जो रोज़ उन मुलाक़ातों का ..

तुझसे मिलने की बेकरारी का , इश्क़ की चढ़ती खुमारी का ,
"चौहान" की ख्वाईश बन कर रह गई उन बेरंग चाहतों का ..

अंदाज़ आज भी वही है ....

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

Monday, 4 December 2017

"मुक़ाम" (MUKAAM)


खुशियां कहाँ अब तो गम भी मेहरबान होगा,
इश्क़-ए-सफ़र में मुक़्क़मल हमें भी मुक़ाम होगा!!

जलता है तो जलता रहे ये जहाँ मेरे दिल का ,
कभी तो यहाँ भी वस्ल-ए-गुल का फ़रमान होगा!!

कभी तो बदलेगी रिवायत-ए-मुहोब्बत तेरे शहर में,
कभी तो यहाँ भी मुहोबत का खुशनुमा अंजाम होगा!!

कब तक बहाता रहेगा "चौहान" लहू अपनी आँखों से ,
कभी तो तेरे इश्क़ में लिपटा हर लम्हा मेरे नाम होगा !!

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम- दिल की ज़ुबाँ

Friday, 1 December 2017

" सफ़र आख़िरी " (SAFAR AKHIRI)


ख़ुद को ख़ुद से हार के बैठा हूँ तेरे इश्क़ में ,
सफ़र आख़री है ये मेरा तुम तक आने का !!

बहा के बैठा हूँ समुंदर अश्क़ों का तेरे इश्क़ में ,
वक़्त आख़री है ये मेरा अश्क़ बहाने का !!

बना के बैठा हूँ नासूर ज़ख़्मों को तेरे इश्क़ में ,
ग़म आख़री है ये तेरा दिल से लगाने का !!

बह निकले है जज़्बात बन के अलफ़ाज़ मेरी कलम से तेरे इश्क़ में,
"चौहान" आख़री है ये फ़साना लिखने लिखाने का !!

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...