सिलसिला तुझे चाहने का , अब तलक जारी है ,
यूँ पल पल अश्क़ बहाने का , अब तलक जारी है !!
सिमटी है कई यादें आज भी उन चाँद तारों में,
इन आसुओं का लबों पे रुक जाना , अब तलक जारी है !!
क्या जो डूब गयी कश्ती हमारी आ के किनारे पर ,
जज़्बा साहिल की चाह में तूफानों से टकराने का , अब तलक जारी है !!
किसको तलाश है अब सहरा में गुलिस्तां की ,
तन्हाई में तेरी यादों का सताना अब तलक जारी है !!
कर भी क्या लेंगे "चौहान" लिख कर "मेरी कलम - दिल की जुबां",
पर क्यूँ तेरा अश्क़ों को लफ़ज़ बनाना अब तलक जारी है!!
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां




