Wednesday, 16 August 2017

"रंग चाहत के " (RANG CHAHAT KE)


कुछ तुम बदले ,कुछ हम बदले ,
वो रंग ना बदले अपनी चाहत के ,
कुछ वक़्त बदला दस्तूर बदला ,
पल बेचैनी के न बदले राहत में ,
शिकवे भी है तुमसे शिकायत भी,
माना अब भी है तुमसे वही चाहत भी ,
देखे तुमसे बहुत इस जहाँ में ,
बस वो ढंग ना बदले हमपे इनायत के,
ढलती गयी शाम और ढलते गए हम ,
फिर उस रात अकेला था चाँद और अकेले थे हम,
लिखते रहे फिर उठा के कलम अपने जज़्बात ,
क्यों ना बदले "चौहान" एहसास तेरी चाहत के ,

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की जुबां 

"एक वक़्त " (EK WAQT)


हर वक़्त एक चहरा नज़र आएगा ,
दिल हर वक़्त तेरा मुझे बुलाएगा ,
आज दूरियाँ है दरमियान तो क्या ,
एक वक़्त ऐसा भी कभी आएगा ,
एकपल भी तुझसे मेरे बिन जिया ना जाएगा..
अच्छी ना लगेगी वो तन्हा रात चांदनी ,
खामोशियों का साया जब तुझपर मंडराएगा ,
मोहलत ना होगी कुछ कहने की जब ,
मेरा साया तक तुम्हे नज़र ना आएगा ,
एक वक़्त ऐसा भी कभी आएगा ,
एकपल भी तुझसे मेरे बिन जिया ना जाएगा..
वो भीगा सावन भी आग सा जलाएगा ,
तेरा दिल मुझे जब पाने को मचल जायेगा ,
लबों से निकलता जब नाम "चौहान" ही आएगा ,
एक वक़्त ऐसा भी कभी आएगा ,
एकपल भी तुझसे मेरे बिन जिया ना जाएगा..

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की ज़ुबाँ

Monday, 7 August 2017

"रोता रहा "(ROTA RHA)


रात भर तेरे दर्द से लिपट कर रोता रहा ,
तेरी यादों में खो के अश्क़ों की माला पिरोता रहा ,
हसरतें भी ना रही दिल की शिव एक तेरी चाहत के,
इन् आँखों में बस वही खवाब बार बार संजोता रहा ..

मिलना भी कहा मुनासिब होता हमारा ,
कहाँ मंज़िल होती उन रास्तों की तुम ,
एक वक़्त-ए-अंदाज़ था जो गुज़र गया ,
बस यही सोच खुद को तेरे गम में डुबोता रहा ...

छू कर कभी ठहर जाता जो तेरे लबों पर हंसी बनकर ,
एक एक कतरा जो बहा तेरी मुस्कानों में छुपकर ,
न गुजरने वाला वो वक़्त "चौहान" तेरी यादों में खोता रहा ,
रात भर तेरे दर्द से लिपट कर रोता रहा ..

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की ज़ुबाँ

Friday, 4 August 2017

"आराम चाहिए " (AARAM CHAHIYE)


इन रास्तों को मुकाम चाहिए ,
इन चाहतों को तेरा नाम चाहिए ,
बहुत चला ज़िंदगी की तलाश में ,
अब इस सफर को आराम चाहिए...
इन खामोशियों को आवाज़ चाहिए,
तन्हाइयों को तेरा एहसास चाहिए,
अब नहीं गुज़रता एक पल भी तेरे बिना ,
अब इस सफर को आराम चाहिए ...
लिखने को फिर वही जज़्बात चाहिए ,
ज़िंदगी के हर दौर में तेरा साथ चाहिए ,
मुक्कमल कर दे फ़साना दिल का "चौहान",
अब इस सफर को आराम चाहिए ...

शुभम सिंह  चौहान
मेरी कलम -  दिल की ज़ुबाँ

"तेरे इश्क़ के " (TERE ISHQ KE)


कुछ लम्हात पुराने बाकी है तेरे इश्क़ के ,
कुछ ख्यालात पुराने बाकी है तेरे इश्क़ के ,
सुनी आँखों में कुछ सपने है,
कुछ ख्वाब अधूरे है तेरे इश्क़ के ....
चलते थे जिन रास्तों पर हाथों में हाथ थाम,
गुज़री थी जो बाँहों में ढलती हुई शाम ,
देखे तेरे इश्क़ के अंदाज़ जो "चौहान",
कुछ राज़ पुराने बाकी है तेरे इश्क़ के ....

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की जुबां 

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...