वक़्त बदला ,वक़्त के साथ बदला ये मौसम ,
पर मेरे इश्क़ का मिज़ाज नहीं बदला ।।
मर कर भी जी रहा हूँ देख तेरे बिन ,
आज भी मेरे जीने का अंदाज़ नहीं बदला ।।
ना जाने कितनी रातें गुज़ार दी तेरे इंतज़ार में ,
पर मेरी खामोशियों का वो साज़ नहीं बदला ।।
मेरी कलम बन तो बैठी ज़ुबाँ दर्द- ऐ -दिल की ,
"चौहान" की कलम से तेरे ज़िकर का वो रिवाज़ नहीं बदला ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ
पर मेरे इश्क़ का मिज़ाज नहीं बदला ।।
मर कर भी जी रहा हूँ देख तेरे बिन ,
आज भी मेरे जीने का अंदाज़ नहीं बदला ।।
ना जाने कितनी रातें गुज़ार दी तेरे इंतज़ार में ,
पर मेरी खामोशियों का वो साज़ नहीं बदला ।।
मेरी कलम बन तो बैठी ज़ुबाँ दर्द- ऐ -दिल की ,
"चौहान" की कलम से तेरे ज़िकर का वो रिवाज़ नहीं बदला ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ
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