गुज़रे लम्हे याद बनके आएंगे ,
तेरे दिल की दुनिया में सैलाब बन कर आएंगे ।।
आँखों से आंसू थम ना पाएंगे ,
तेरे जहन में ऐसे ख्यालात बन कर आएंगे ।।
सवेरा नया होगा पर वो पल ना तेरा होगा ,
मुझे पाने को बेबस जब दिल तेरा होगा ।।
ऐसे दर्द-ए-दिल के हालत बनकर आएंगे ,
गुज़रे लम्हे जब याद बन कर आएंगे ।।
तेरी तन्हाइयों में शरीक़ जब हम होंगे ,
हर पल तड़पते तुझे जब ये गम होंगे ।
कहाँ तेरे दिल में फिर "चौहान" के सिवा किसी और का बसेरा होगा ,
तेरे लबों पर फिर वो गम दर्द भरे अलफ़ाज़ बन कर आएंगे ।।
गुज़रे लम्हे जब याद बन कर आएंगे ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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