क्यूँ फासले आज हमारे दरमियाँ है ,
तू नहीं तो सुना मेरा ये जहाँ है ।।
बात मुकद्दर की तो नहीं है मिलना बिछरड़ना,
फरेब की दुनिया में ये मेरे इश्क़ का इम्तिहान है।।
कौन आ के बसेगा मेरे तन्हा दिल में तेरे सिवा,
इस दिल में खंण्डर तेरे बिन एक मकान है ।।
मेरे लिए तो मेरा पीर-ओ-मुरशद मेरा परवर दिगार है,
तेरे बिना मेरे लिए घर मंदिर सब शमशान हैं।।
तुम होते तो शायद ना होती "मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ "
तू सोच के देख मेरे बिना क्या वजूद तेरा "चौहान" है।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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