मैं और मेरे कुछ दोस्त अब बस बातें किया करते है,
साथ कुछ पल पहले की तरह बिताने की,
कहीं दूर सब एक साथ घूम के आने की ,
फुर्सत से मिलकर वक़्त साथ बिताने की,
मैं और मेरे कुछ दोस्त अब बस बाते किया करते है।।
वो बीते पुराने बचपन के दिन,
वो फुर्सत के लम्हे, वो मस्ती भरे दिन,
अब हम केवल तन्हा बैठकर यादों में जिया करते है,
मैं और मेरे कुछ दोस्त अब बस बातें किया करते है।।
हर कोई अब मशरूफ़ अपने कामों में है,
कुछ परेशानियों में तो कुछ नये इंतज़ामों में है,
पर सब बेख़र है एक बात से ,
आज सब एक दूसरे के इल्ज़ामों में है,
सब एक दूसरे कि अब बस राहे तका करते है,
मैं और मेरे कुछ दोस्त, अब बस बातें किया करते है।।
यूँ जज़्बातों से कागज़ कुरेद कर क्या होगा"चौहान",
ये जज़्बाती अल्फ़ाज़ भी तो तन्हाई में पढ़ा करते है,
मैं और मेरे दोस्त अब सिर्फ बातें किया करते है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।





