चाहतें तुमसे ऐसी बार-बार होंगी ,
हर बार युहीं बेशुमार होंगी।।
आँखों में रहेगा एक चेहरा तेरा ,
दिदार- ए -हसरत युहीं बेशुमार होंगी ।।
फिर एक ख्वाब होगा हर रात तुमसे मिलने का ,
मिलने की हसरतें तुमसे युहीं बेशुमार होंगी ।।
भर लूंगा हँस के दामन तेरे दर्द-ओ-गम से अपना ,
हर जनम तेरी ख़ुशी के लिए मिटने की लगन बेशुमार होगी।।
क्या हुआ अगर मुक़्क़मल न हो सकेगा ये फलसफ़ा इश्क़ का ,
हर सज़दे में तुझे पाने की चाहत बेशुमार होगी ।।
क्या हुआ "चौहान " अगर तुम मिले न मिले इस जनम ,
तुम्हे खुदा बना तेरी इबादत हर जनम युहीं बेशुमार होंगी।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां

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