Friday, 7 July 2017

"बेशुमार "(BESHUMAR)


चाहतें तुमसे ऐसी बार-बार होंगी ,
हर बार युहीं बेशुमार होंगी।।

आँखों में रहेगा एक चेहरा तेरा ,
दिदार- ए -हसरत युहीं बेशुमार होंगी ।।

फिर एक ख्वाब होगा हर रात तुमसे मिलने का ,
मिलने की हसरतें तुमसे युहीं बेशुमार होंगी ।।

भर लूंगा हँस के दामन तेरे दर्द-ओ-गम से अपना ,
हर जनम तेरी ख़ुशी के लिए मिटने की लगन बेशुमार होगी।।

क्या हुआ अगर मुक़्क़मल न हो सकेगा ये फलसफ़ा इश्क़ का ,
हर सज़दे में तुझे पाने की चाहत बेशुमार होगी ।।

क्या हुआ "चौहान " अगर तुम  मिले न मिले इस जनम ,
तुम्हे खुदा बना तेरी इबादत हर जनम युहीं बेशुमार होंगी।।

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की जुबां


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