एक रात की कहानी थी इश्क़ की बरसातें थी,
एक मुरझाए फूल को मैंने सूखने से बचा लिया।।
सुरूर था मुहोब्बत का ,इश्क़ के नशे में चूर थे हम,
एक दरिया शराब का मैंने आँखो से बहा दिया।।
ख्वाइशें थी दिल की उसकी सोहबत में रहना,
इस आरज़ू में कितने ग़मो को सीने से लगा लिया।।
क्या कुछ तो नही किया मैंने एक उसकी ख़ातिर,
उसके ख़्वाबों के ख़ातिर खुद के ख़्वाबों को जला दिया।।
हर पत्थर को पत्थर समझ ठोकर नही मारी"चौहान",
कसूर इतना था खुदा समझ माथे से लगा लिया।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

क्या खूब लिखते हो amazing lines 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👌👌👌👌👌👏👏👏👏👏👌💯🙂
ReplyDeleteThanks alot Manpreet 😊😊😊😊😊😊🤗🤗🤗🤗🤗
Deleteसुरूर था मुहोब्बत का ,इश्क़ के नशे में चूर थे हम,
ReplyDeleteएक दरिया शराब का मैंने आँखो से बहा दिया ek no Bhai ❤️❤️❤️❤️❤️❤️
Thanks alot bro 🤗🤗🤗🤗
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