क्या हुआ अगर तू बुलाये या न बुलाये ,
तेरे दिल की चोखट पर आ ही जाऊंगा ।।
क्या हुआ अगर तू मेरा जिक्र मेरी बात ना करे ,
लफ्ज़ बन के तेरे लबों पर आ ही जाऊंगा ।।
क्या हुआ अगर तू महसूस ना करे ,
हवा बन के तेरी साँसों में घुल ही जाऊंगा ।।
क्या हुआ अगर कबूल न हो सजदे मेरे ,
तेरे इश्क़-ए-इब्बादत में मर भी जाऊंगा ।।
तू माने या ना माने "चौहान" को अपना ,
मैं तो मरकर भी तेरी ही कहलाऊंगा ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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