Wednesday, 21 April 2021

"गुनाह"(GUNAAH)



गुनाह कितने है मेरे,
मैं खुद नही जानता,
मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।।

जवाब तो बात दूर की है,
ये भी तो एक सवाल ही है,
मैं तुझसे क्या सवाल करूँ।।


गहराई कौन जान सकता है,
इन आँखों मे बहते सागर की,
कितना रोऊँ जो इन्हें खाली करूँ।।

ये भी तो एक गिला है मुझे,
मेरी ज़िंदगी तक बेरंग है,
तेरी तस्वीर में रंग क्या भरूँ।।

हर रोज़ एक नयी कोशिश, फिर वही बात,
हर नज़्म अधूरी रह गई "चौहान",
मैं तेरे नाम पर किताबें क्या भरूँ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
 

Friday, 2 April 2021

"अब कर ही लीजिए" (AB KAR HI LIJIYE)


अब कर लीजिए,
हाल अपना भी मेरे जैसा,
ये तन्हाई भरा आलम,
दिन-रात एक जैसा,
अब कर लीजिए।।

अब तुम भी उसी जगह हो,
जहाँ कल हम हुआ करते थे,
तू भी मर जाना किसी के लिए,
जैसे तुमपर हम मरा करते थे,
इश्क़ हमारे जैसा ही तुम गैरों से,
अब कर ही लीजिए।।
हाल अपना भी मेरे जैसा,
अब कर ही लीजिए।।

बात कसमें वादों की,
इन अटूट रिश्ते नातो की,
इश्क़ में मुलाकातों की,
कुछ ख़्याल और जज़्बातों की,
जो इश्क़ में दी सौगातों की,
अब कर ही लीजिए,
हमारा क्या पता हमें,
कब तलक ज़िंदा है,
बन के गैरों के हमसफ़र,
ये जिंदगी मुक्कमल "चौहान"
अब कर ही लीजिए।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।


 

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...