उन्होंने पूछना छोड़ दिया,
हमने बताना छोड़ दिया,
जब इश्क़ उन्हें मज़बूरी लगने लगा ,
हमने जाताना छोड़ दिया ।।
वादे भी सच्चे थे ,
इरादे भी पक्के थे ,
जब मज़बूरी बन गए रिश्ते ,
हमने निभाना छोड़ दिया ।।
पास वो आना नही चाहते थे ,
दूर हम जाना नही चाहते थे ,
जब वो ढूँढने लगे बहाना,
हमने करीब आना छोड़ दिया।।
कुछ जज़्बात हमारे भी थे ,
कुछ ख़यालात हमारे भी थे ,
जब महज़ बातें लगी उनको,
हाल-ए-दिल हमने बताना छोड़ दिया ।।
आँखों में हमारे भी नमी थी ,
ज़िन्दगी में हमारे भी कमी थी ,
जब बेपरवाह हुए वो हमसे ,
हमने भी अश्क़ बहाना छोड़ दिया।।
कुछ ख़्वाब हमने भी पाले थे,
तेरे गम हमने भी संभाले थे ,
जब सौंगत लगने लगे तेरे दिए ज़ख्म,
मरहम हमने भी लगाना छोड़ दिया ।।
लिखा हमने भी बहुत कुछ था ,
कहा हमने भी बहुत कुछ था ,
जब अनदेखा करने लगे वो "चौहान"
हमने भी लिखना-लिखाना छोड़ दिया।।
आज आलम ये है के तन्हा हम है ,
तन्हा वो है हमारी यादों में ,
जबसे हो के गए है वो हमारी कब्र से ,
सुना है मुहोब्बत की गलियों में अब जाना छोड़ दिया।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।















