अब हम मिल भी गए तो क्या होगा,
अब वो पहले वाली बात नही है।।
इश्क़ आज भी है तुझसे कल भी रहेगा,
पर अब वो पहले वाले ख़्यालात नही है।।
समझा लिया है अपने नादान दिल को,
अब पहले वाले हमारे हालात नही है।।
क्यों अश्क़ बहाऊँ अब तुझे पाने की खातिर,
हम पत्थरो में अब कोई जज़्बात नही है।।
दोस्ती कर ली है अब तन्हाई से हमनें,
अब किसी के साथ मे वो बात नही है।।
हाँ तू सोच ले अब फर्क नही पड़ता मुझे,
पर अब तू भी वो रूह-ए-कायनात नही है।।
मर जाना ही बेहतर था "चौहान" सो मर गए,
तेरे शहर में सच्ची मुहोब्बत की बिसात नही है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।











