साँसों में अब भी वो रवानगी है ,
जज़्बातों में अब भी वो दीवानगी है ,
पागलपन है हद्द से ज़्यादा बेखुदी है ,
तू कहीं भी रहे मेरे दिल में तेरी मौजूदगी है।।
आँखों में एक तड़प एक इंतज़ार है ,
एक अरसे से तुझे देखने को बेक़रार है ,
तन्हाइयों का आलम है मेरे ज़ेहनोजान में ,
मेरे लम्हों में अब आहिस्तगी है ,
तू कहीं भी रहे मेरे दिल में तेरी मौजूदगी है।।
हर बात में आज भी तेरा ज़िक्र है ,
हर पल दिल को तेरी फ़िक्र है ,
तेरे दिए जो पैगाम है "चौहान" को ,
उनमे आज भी ताज़गी है
तू कहीं भी रहे मेरे दिल में तेरी मौजूदगी है।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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