Monday, 10 July 2017

"कभी सोचा है " ( KABHI SOCHA HAI)


कभी सोचा है ये तूने मैं ना रहा तो ,
तुमसे यूँ मुहोब्बत करेगा कौन

खुद के जिस्म की बना के रूह तुमको ,
तुमसे यूँ चाहत करेगा कौन ??

कौन करेगा यूँ हरपल फ़िक्र तेरी ,
तेरे लिए नींदें खराब अपनी करेगा कौन ??

कौन करेगा सजदे दर-दर तेरी ख़ातिर,
तुझे पाने की हसरत फिर करेगा कौन ??


कौन करेगा हद्द से ज़्यादा इश्क़ तुम्हे मेरे बाद ,
तुझे खुदा बना के तेरी इब्बादत करेगा कौन ??

कर बेपरवाही लाख "चौहान " से मगर याद रखना ,
मेरे बाद तेरे गमो से अपना दामन फिर भरेगा कौन ??

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की ज़ुबाँ

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