रोई तो होगी वो भी मुझसे दूर होके ,
दुनियाँ के खोंखले रिवाज़ो में मजबूर होके ।।
टूटे होंगे ख़्वाब उसके भी शीशे की तरहा ,
सहमी होगी रूह उसकी यूँ निश्त-ओ-नाबूद होके ।।
अब सजना-सवरना भी उसको कहाँ अच्छा लगता होगा ,
करती होगी शिकवे किस्मत से गमो में चूर होके ।।
छिप गयी होगी वो चेहरे की मुस्कान उदासियों के पीछे ,
याद करती होगी चेहरा मेरा अपनी आँखों को मींचे।।
रंग फीका लगा होगा उसे मेहँदी का मेरे इश्क़ के रंग के आगे ,
ये दुनिया भी फिर उसे बेरंग नज़र आयी होगी मुझसे दूर होके ।।
पहन कर लाल जोड़ा जब किसी और के नाम की मांग सजाई होगी ,
रात बिस्तर पर मेरे इश्क़ की लाश बिछाई होगी।।
कटपुतली सी बन कर रह गयी होगी फिर वो ,
फिर कहाँ उस जिस्म में वो रूह लौट कर आयी होगी।।
अब कौन आँसू पोंछ उसे सीने से लगता होगा ,
कौन होगा जो खुद रोकर भी उसे हॅसता होगा ।।
शायद अब भी वो उँगलियाँ अपनी लटों में घुमाती होगी ,
शायद अब भी वो बिन बोले मेरे दिल का हाल जान जाती होगी।।
शायद अब भी उसे पल-पल मेरी फ़िक्र सताती होगी ,
शायद अब भी उसे तन्हाई में मेरी याद आती होगी ।।
क्यों छोड़ जाते है लोग अक्सर इश्क़ में मग़रूर होके ,
तूने भी क्या पा लिया "चौहान" इस बस्ती में मशहूर होके ।।
रोई तो होगी वो भी मुझसे दूर होके ,
दुनियाँ के खोंखले रिवाज़ो में मजबूर होके ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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