तेरे बिना क्या सफर क्या ज़िंदगी है ,
तू आँखों की नमी तू लबों की हसीं है ।।
क्या आसमां मेरा कैसी तुझ बिन ज़मीं है ,
तुझे मैं ना सही पर मुझे तू लाज़मी है ।।
बात कैसे कहुँ तुमसे हाल-ए-दिल की ,
इस दिल-ए-नादान की मुश्किल की,
तेरी यादों में गुमशुदा हूँ इस ज़िंदगी में तेरी कमी है।।
कोई बदले जो मुक्कदर तो मैं भी फ़रियाद करूँ ,
तुझे पा के खुद को आबाद करूँ,
क्या बताये "चौहान" तुझ बिन आलम दिल का ,
ज़िस्म तो है बस रूह की कमी है ।।
तुझे मैं ना सही पर मुझे तू लाज़मी है ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

No comments:
Post a Comment