Wednesday, 30 January 2019

"सियासत" (SIYAASAT)


ज़िंदगी आज भी मेरे जिंदा होने की वज़ह पुछती है,
कहाँ खुशियां अब मेरी चौंखट का पता पुछती है।।

वो बचपन का लड़कपन था हुकुमत हमारी,
कहाँ अब ये दुनिया मुझसे मेरी रज़ा पुछती है।।

हर कोई मुनाफ़ा देखता है रिश्तों के व्यापार में,
कहाँ नियत फिर इस दोगलेपन की वजह पुछती है।।

पैसों में बिक जाते है लोगों के ज़मीर तक यहाँ,
भूख पैसों की कहाँ गुनाहों की सज़ा पुछती है।।

वो नोंच नोंच कर खा जाते है जिस्म आँखों से ही,
दुनिया है कि आज भी कपड़ो में हया ढूंढती है।।

खोदते देखा है मैंने कब्र ईमानदारी को खुद की,
सच्चाई है अपने वजूद का कोई गवाह ढूंढती है।।

घात लगाए बैठा है हर कोई यहां एक दूसरे पर,
खूबियों से मतलब नही दुनिया बस खामियां ढूंढती है।।

बातें इश्क़ मुहोब्बत की ही लिखा कर "चौहान",
सियासती दुनिया है पहले जात-धर्म फिर काम पुछती है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Saturday, 26 January 2019

"मैं और मेरी तन्हाई" (MAIN AUR MERI TANHAI) (VIDEO)







S.M.CREATIONS "MERI
KALAM - DIL KI ZUBAA'N " PRESENTS….

TITLE : "मैं
और मेरी तन्हाई" (
MAIN AUR MERI TANHAI)

https://youtu.be/z6OFOHmMUZI

VOICE : MADHU SHILLA

 WRITER: SHUBHAM SINGH CHAUHAN & WELSON
WEKA

LABEL : S.M.CREATIONS
"MERI KALAM - DIL KI ZUBAA'N "

FULL POEM READ ON MY
BLOG ..

 https://merikalamdilkizubaan.blogspot.com/



Thursday, 24 January 2019

"जब कभी" (JAB KABHI)


जब कभी लिखने बैठूंगा तो हालतों को झंझोड़ दूंगा,
कतरा कतरा जज़बातों का मेरे दिल से निचोड़ दूंगा।।

ये जो तनहाईयाँ आज जकड़े हुए है मेरे दिल को,
ये पाश तेरी यादों का एक ना एक दिन तोड़ दूंगा।।

मिट्टी कर मिट्टी में मिला दूंगा ख़्वाब अपने सारे,
नाता तेरे ख़्वाब सँजोती हुई नींदों से भी तोड़ दूंगा।।

कहीं एक लौ जल रही है तेरे इश्क़ की मेरे दिल में,
राख कर खुद को इसे भी गँगा में बहने को छोड़ दूंगा।।

हक़ीक़त जान ले नाता रूह का था जिस्मो का नही,
दफ़न कर रूह अपनी ये नाता भी तुझसे तोड़ दूँगा।।

आज कदर नही जब लिखता हूँ हर लफ्ज़ तेरी ख़ातिर,
हाल-ए-दिल "चौहान" लफ़्ज़ों में पिरोना भी छोड़ दूँगा।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Friday, 18 January 2019

"बातें प्यार की" (BAATEN PYAR KI)



सिर्फ़ क़िताबों में लिखने की नही होती, बातें प्यार की,
सिर्फ़ आंखों की हसरत नही होती, किसी के दीदार की,
मेरे लफ्ज़ों में रूहानियत नही पर एहसास है,
बस दो कदम चलने से नही मिलती मंज़िलें प्यार की।।

मेरे ख्वाबों में तस्स्वुर है मेरे अहबाब का,
मेरे दिल-ए-अंजुमन में बसेरा है मेरे यार का,
मेरे चश्में-पूर्ब से झलकता एक अबसार है,
बस ख्वाईशें है इस बिबियान में बर्गो बहार की,
बस दो कदम चलने से नही मिलती मंज़िलें प्यार की।।

ये स्याही नही मेरी तहरीर के अश्क़ है जो बह निकलते है,
ये उनसे मिले ज़ख़्मों के हिसाब माँगने निकल पड़ते है,
मेरे इश्क़ का ये फैसला इन किताबों में बरकरार है,
"चौहान" के अल्फ़ाज़ों में ख्वाईशें है तेरे इकरार की ,
बस दो कदम चलने से नही मिलती मंज़िलें प्यार की।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।



Wednesday, 16 January 2019

"मैं और मेरी तन्हाई" (MAIN AUR MERI TANHAI)


अक्सर मेरी तन्हाई मुझसे रूठ जाती है.....
उसे शिकायत है मुझसे,
मैं उसके साथ क्यों नहीं रहता,
उससे बात क्यों नहीं करता।।

पर कुछ पल के लिए जब कोई साथ आता है,
खामोश रहकर भी सब कुछ कह जाता है।।

तो लगता है कि अब मुझे तन्हाई की जरूरत नहीं
इससे ज्यादा और कोई खूबसूरत नहीं ।।

सपने देखने लगता हूं उसका साथ निभाने के ,
उसके साथ अपनी पूरी दुनिया बसाने के ।।

पर मैं अनजान था कि उसके कई किरदार है ,
मैं  पहला प्यार नहीं उसके और भी प्यार हैं।।

मैं तो खिलौना था कुछ पल खेला और तोड़ दिया ,
जब जी भर गया मुझसे तो अकेला छोड़ दिया ।।

तमाम कोशिश करता रहा मैं रिश्ते बचाने के लिए,
और वह रोज बहाने ढूंढती थी मुझसे दूर जाने के लिए।।

मैं पूछता हूँ उससे मेरी खता क्या है ।
मुझसे दूर जाने की वजह क्या है।

उसने कहा जो ढूंढती हूं तुझमें वो बात नहीं है,
अब हमारे मिलते ख्यालात नहीं हैं।।

तुम मुझे खुश रख सको ये तो बहुत दूर की बात है,
मेरे साथ खड़े होने की तेरी औकात नहीं है ।

मैं यह सुनकर लौट आया टूटे दिल के साथ,
हां शायद मुझ में नहीं थी वो बात।।

यह सब सुनकर के रो रहा मेरा जमीर था
पैसे से नहीं  पर मैं दिल से तो  अमीर था ।।

अब लौट आया हूं  वापस अपने तन्हाई के लिए,
शुक्रिया ऐ मेरे दोस्त तेरी बेवफाई के लिए।।

अब तो ज़िद्द है "चौहान" इस हद तक गुज़र जाऊंगा,
लाख फरियादें करे तो भी लौट के ना आऊँगा।।

जिसे चाहा अपना वजूद भूल कर वो तो अपना ना हुआ,
पर हाँ एक दिन मैं तन्हाइयों का हो ही जाऊंगा।।

तन्हाई के साथ बातें करूंगा उसका साथ निभाऊंगा,
इस तरह खो जाऊंगा तन्हाई में, एक दिन मै भी तन्हा हो जाऊंगा।।

BY :-
WELSON WEKA
(MY LOST BOOK)

ADDITIONAL:-
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Saturday, 12 January 2019

"अधूरी बातें" (ADHURI BAATEN)


कहानी मेरे इश्क़ की आज अधूरी रह गयी,
बातें कुछ बतानी थी जो ज़रूरी रह गयी।।

कभी समझा ना पाया जज़्बात बोलकर ,
वो आज लबों की मेरी ख़ामोशी कह गयी।।

अरमान भी कुछ मेरे यूँ दबकर रह गए,
अश्क़ों के सागर में डूब कर मेरी खुशी बह गयी।।

तलाशने लगा हूँ खुद को आज खुद में मैं,
शायद मेरे जिस्म में मरकर मेरी रूह रह गयी।।

ना जाने किस मंज़िल की तलाश में भटक रहा हूँ,
मंज़िल पाकर भी चाहत मंज़िल पाने की रह गयी।।

अब छोड़ दे "चौहान" झुझना हालातों से अकेले,
लाश अरमानों की दफन मेरी कहानियों में रह गयी।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Wednesday, 9 January 2019

"इश्क़ अनोखा" (ISHQ ANOKHAA)





हदों में है पर हदों से परे है,

जो लहू बन मेरी रगो में घुल है,

सच्चा है इसका हरपल ,

एक पल भी ना धोखा है,

मुझे तुमसे है तो तुम्हे किसी और से,

देख मेरा इश्क़ कितना अनोखा है।।



आग सी तपन भी है तो,

पानी सी ठंडक भी,

सुबह सी चमक भी है तो,

शाम की ललक भी,

इसके दर्द में मिलता मुझे आराम है,

तू पुछती है मुझसे,

कैसा ये प्यार है,

सच है या धोखा है??

मुझे तुमसे है तो तुम्हे किसी और से,

देख मेरा इश्क़ कितना अनोखा है।।



कुछ पाने की उम्मीद ना है,

फिर भी तुझे पाने का ये डर कैसा है,

लगता नही अब तलक तेरे बिन,

कहीं मेरे जिस्म में तू रूह के जैसा है।।

लबों पर ख़ामोशी है कैसी "चौहान",

ये दिल मे मचा कैसा कोहराम है,

तू पुछती है मुझसे,

कैसा ये प्यार है,

सच है या धोखा है??

मुझे तुमसे है तो तुम्हे किसी और से,

देख मेरा इश्क़ कितना अनोखा है।।



शुभम् सिंह चौहान

मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Monday, 7 January 2019

"मुलाकात" (MULAKAT)


चल ना आज खुद से मुलाकात करते है,
जो बातें तू भूल गयी उनको याद करते है।।

याद तो होगा ना वो रात भर मुझसे बात करना,
मेरी खामोशी की शिकायत मुझसे ही करना।।

याद है ना तुमने कहा था एक दिन मैं भी बदला लुंगी,
बोलोगे तुम मुझे कई दफा पर मैं भी कुछ ना बोलूंगी।।

याद तो है ना जब घर मैं जाता था तब मन तेरा ना लगता था,
रोज़ रोज़ मिलने को तुझसे मैं भी कितना तड़पता था।।

याद तो है ना तुझे वो रात जो हमने बाहर बिताई थी,
मेरे सीने पर रख कर सिर तुझे नींद भी सुकून की आयी थी।।

याद तो है ना तुझे जब तू हाथ पकड़ पर दूर ले जाती थी,
वो पल पल मेरा हो जाता था जब पास तू मेरे आ जाती थी।।

याद तो होगा ना "मैं बस तुम्हारी हूँ" ये तुमने बोला था,
हाथ पकड़ सीने से लगा लिया था जब मैंने जाने को बोला था।।

गुस्सा करता था तेरी छोटी छोटी बातों पर रुठ भी जाया करता था,
तेरा मनाना अच्छा लगता था एक बोल से मान भी जाया करता था।।

याद है तुझे जब तूने रात को मुझे अचानक से जगाया था,
कितनी बार तेरी शरारतों पर मैंने तुझे गले से लगाया था।।

फिर ना जाने क्या ख़ता हुई क्या इश्क़ में कमी रह गयी,
लबों की हंसी ना ला सका बस आंखों की नमी रह गयी।।

इश्क़ तो किया पर तेरे लायक ही ना बन पाया,
ज़ख्म दिल का देख आज सहन ही ना कर पाया।।

आज भी मैं ज़िद्द तो तेरी खुशियों की लिए बैठा हूँ,
आज चुप करवाने वाला नही है अश्को को पिये बैठा हुँ।।

तू कहती थी ना कि मैं तुझे बहुत समझता हुँ,
तेरी ज़िंदगी में मैं भी बहुत एहमियत रखता हूँ।।

गर ख़ता थी कोई तो बोल कर बता जाती,
माफ नही करना था तो सज़ा पास रहकर दे जाती।।

तुझे खोने के डर से ना जाने कितना रोया था,
रात भर जागा भी था तेरी नींदों में सोया था।।

बहुत परेशान भी किया था माना मैंने तुझे,
सच बता क्या हक़ीक़त में नही जाना मैंने तुझे।।

बता ना कौन सी ऐसी बात थी मेरी जिसने तेरा दिल तोड़ा था,
माफ भी ना कर पाई मुझे एक पल में रिश्ता तोड़ा था।।

तू रूह है मेरी मैं अपना ईमान कैसे बदल लूँ,
दुआ कबुल ना हुई तो क्या भगवान कैसे बदल लूँ।।

आज भी "चौहान" तेरा इंतज़ार करता है,
आ देख ले हाल पल पल तेरे लिए मरता है।।

चल ना माफ करदे एक नई शुरुआत करते है,
भुला के सब कुछ आज फिर मुलाकात करते है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम -दिल की ज़ुबाँ।।




Saturday, 5 January 2019

"दूर तुझसे" (DOOR TUJHSE)


जा रहा हूँ दूर तुझसे,
याद आये तो फ़िज़ाओं में महसूस करना,
लौट आऊंगा खुशबू बनके,
बस अपनी साँसों में घुलने देना..

जा रहा हूँ दूर तुझसे,
इन घटाओं में महसूस करना,
बरस जाऊंगा बारिश बन के,
बस खुद पर बरसने देना,

जा रहा हूँ दूर तुझसे,
इन हवाओं में महसूस करना,
लौट आऊंगा तुझको छुने,
बस इन गेसुओं से गुजरने देना,

जा रहा हूँ दूर तुझसे,
अपने दिल मे महसूस करना,
बस जाऊंगा आंखों में,
अश्क़ों के बहाने ना निकाल देना,

जा रहा हूँ दूर तुझसे ,
इन लफ्ज़ों में महसूस करना,
उतर जाऊंगा कागज़ पर तेरे दिल के,
जला के राख मत कर देना,

जा रहा हूँ दूर तुझसे,
हो सके तो याद मत करना,
कमी महसूस हो कभी जो "चौहान"की,
खुद को उदास मत करना,
लौट कर नही आते जाने वाले दुनिया से,
रात भर शमशानों में तलाश मत करना,
बस। समझा लेना अपने मन को,
मेरे आने की अब कभी आस मत करना।।
जा रहा हूँ दूर तुझसे।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Thursday, 3 January 2019

"आज बात" (AAJ BAAT)


आज बात अपनी करते है,
चल शुरू से शुरुआत करते है।।

याद है राज़ दिल का जब तूने खोल था,
मैं बस तुम्हारी हूँ कभी तुमने बोला था।।

तुझे मैंने भी अपनी ज़िंदगी माना था,
ख़्वाब नही तुझे हकीकत जाना था।।

भूल गयी शायद तुम अपनी कही बात,
वो बाहों में बाहें और तन्हाई भरी रात।।

भूल गयी वो हक जो तूने बस मुझे दिया था,
या याद दिलाऊँ तेरे बिना तेरे साथ कितना जिया था।।

हाथ पकड़ पर रोक तो लिया था तुमने,
कभी समझा ही नही फैसला क्यों ये लिया मैंने।।

तेरे साथ तो नही हूँ पर आज भी तेरे पास हूँ,
जीना चाहती है तो जी ले मुझमे मैं एहसास हूँ।।

काश कभी तूने मुझे समझ ही लिया होता,
काश चहरे के साथ दिल भी पढ़ लिया होता।।

कसम तो आज भी याद है जो साथ निभाने की,
तूने भी तो खाई थी कभी दूर ना जाने की।।

साथ मत रहती पर मेरे पास ही रह लेती,
कोई शिकायत थी तो एक दफा कह लेती।।

बस तुझे मेरा नाराज़ होना ही नज़र आया,
पास आना नही हर बार रूठ जाना नज़र आया।।

इश्क़ में ताज महल नही तो नही बना सका,
पर छोटी-छोटी खुशियों का आशियाना नही भाया।।

आज दूर हो गया हूँ तो वजह ढूंढती हो भूलने की,
काश थोड़ी कोशिश कर लेती ना मिलने की।।

आज कहती है शरेआम प्यार का इज़हार करते है,
आज "चौहान" कब्र पर अश्क़ों की बरसात करते है।।


आज बात अपनी करते है,
चल शुरू से शुरुआत करते है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।








"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...