चल ना आज खुद से मुलाकात करते है,
जो बातें तू भूल गयी उनको याद करते है।।
याद तो होगा ना वो रात भर मुझसे बात करना,
मेरी खामोशी की शिकायत मुझसे ही करना।।
याद है ना तुमने कहा था एक दिन मैं भी बदला लुंगी,
बोलोगे तुम मुझे कई दफा पर मैं भी कुछ ना बोलूंगी।।
याद तो है ना जब घर मैं जाता था तब मन तेरा ना लगता था,
रोज़ रोज़ मिलने को तुझसे मैं भी कितना तड़पता था।।
याद तो है ना तुझे वो रात जो हमने बाहर बिताई थी,
मेरे सीने पर रख कर सिर तुझे नींद भी सुकून की आयी थी।।
याद तो है ना तुझे जब तू हाथ पकड़ पर दूर ले जाती थी,
वो पल पल मेरा हो जाता था जब पास तू मेरे आ जाती थी।।
याद तो होगा ना "मैं बस तुम्हारी हूँ" ये तुमने बोला था,
हाथ पकड़ सीने से लगा लिया था जब मैंने जाने को बोला था।।
गुस्सा करता था तेरी छोटी छोटी बातों पर रुठ भी जाया करता था,
तेरा मनाना अच्छा लगता था एक बोल से मान भी जाया करता था।।
याद है तुझे जब तूने रात को मुझे अचानक से जगाया था,
कितनी बार तेरी शरारतों पर मैंने तुझे गले से लगाया था।।
फिर ना जाने क्या ख़ता हुई क्या इश्क़ में कमी रह गयी,
लबों की हंसी ना ला सका बस आंखों की नमी रह गयी।।
इश्क़ तो किया पर तेरे लायक ही ना बन पाया,
ज़ख्म दिल का देख आज सहन ही ना कर पाया।।
आज भी मैं ज़िद्द तो तेरी खुशियों की लिए बैठा हूँ,
आज चुप करवाने वाला नही है अश्को को पिये बैठा हुँ।।
तू कहती थी ना कि मैं तुझे बहुत समझता हुँ,
तेरी ज़िंदगी में मैं भी बहुत एहमियत रखता हूँ।।
गर ख़ता थी कोई तो बोल कर बता जाती,
माफ नही करना था तो सज़ा पास रहकर दे जाती।।
तुझे खोने के डर से ना जाने कितना रोया था,
रात भर जागा भी था तेरी नींदों में सोया था।।
बहुत परेशान भी किया था माना मैंने तुझे,
सच बता क्या हक़ीक़त में नही जाना मैंने तुझे।।
बता ना कौन सी ऐसी बात थी मेरी जिसने तेरा दिल तोड़ा था,
माफ भी ना कर पाई मुझे एक पल में रिश्ता तोड़ा था।।
तू रूह है मेरी मैं अपना ईमान कैसे बदल लूँ,
दुआ कबुल ना हुई तो क्या भगवान कैसे बदल लूँ।।
आज भी "चौहान" तेरा इंतज़ार करता है,
आ देख ले हाल पल पल तेरे लिए मरता है।।
चल ना माफ करदे एक नई शुरुआत करते है,
भुला के सब कुछ आज फिर मुलाकात करते है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम -दिल की ज़ुबाँ।।