ना ये हालत होती , ना ये हालात होते ,
ना कुछ ख्याल होते , ना कुछ जज़्बात होते ,
फिर कुछ अलग ही ये लम्हात होते ,
आज अगर तुम साथ होते ।।
टूटा ना ये दिल होता , जीना ना यूँ मुश्किल होता ,
बड़ा हसीं ये सफर होता तू जो मेरा हमसफ़र होता ,
ना ये तन्हा रातें होती ना ये अश्क़ों की सौंगात होते,
फिर कुछ अलग ही ये लम्हात होते ,
आज अगर तुम साथ होते।।
रखता बसा के सीने में तुझे रूह की तरहां,
बहती रगो में "चौहान" के तू लहू की तरहां,
ना यूँ बेखबर तुम होते , ना यूँ लम्हा-लम्हा हम रोते,
फिर कुछ अलग ही ये लम्हात होते ,
आज अगर तुम साथ होते।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां

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