Monday, 31 December 2018

"इस साल"(ISS SAAL)


इस साल कोशिशें नाकाम नही होगी,
महफिलें भी फिर आम नही होंगी,
नही रखेंगे वास्ता तुझसे तेरी यादों से,
इस साल तेरी यादों में ढलती शाम नही होगी।।

सावन तो आएगा पर ये आंखें ना बरसेंगी,
तुझे देखने को अब कभी ना तरसेंगी,
खुशियाँ भी देंगी दस्तक़ चौंखट पर मेरी,
इस साल मंज़िलें गुमनाम नही होंगी।।

ना लिखेंगे फ़साने मुहोब्बत के हम,
ना बनेंगे नासूर अब दिल के ज़ख्म,
अब फ़र्क नही पड़ेगा किसी की बातों का,
अब दिल की बस्ती किसी की गुलाम नही होंगी।।

जो पाया वो कुछ काम ही ना आया,
जो छोड़ गया वो कभी लौट ही ना पाया,
छुपके से आ ही जाऊंगा करीब तुझ तक,
हसरतें तुझे पाने की अब शरेआम नही होंगी।।

तन्हाइयों से भी अपना सारा नाता तोड़ लेंगे,
खुद का खुद से ऐसा रिश्ता हम जोड़ लेंगे,
लिखना छोड़ देगा अब ज़िक्र तेरा "चौहान",
इस साल ये कविताएं भी बेनाम नहीं होंगी।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।


Saturday, 29 December 2018

"वो ज़ुदा हो गए " (WO JUDAA HO GYE)


कसमे खाई थी जिन रास्तों पर चलने की साथ मेरे,
मंज़िल से पहले फिर क्यों हमसफ़र वो जुदा हो गए।।

कभी पल भर में बरस जाती थी आंखें जो दूरी में,
आज कैसे वो आँखों के साग़र सुख के सहरा हो गए ।।

दिल क्या जान तक रख दी जिसके कदमो में हमनें,
आज कैसे मान लूं की वो हमसे बेवफा हो गए ।।

जो कभी झुकाते थे सर हर दर चोंखट पर तेरी खातिर,
सुना है आज कल वो शक़्स तो खुद से खफ़ा हो गए।।

तूने इश्क़ में जिसे चाहा जिसकी इबादत की हर पहर,
देख ले  "चौहान" वो पत्थर तो सच मे खुदा हो गए।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।





Thursday, 27 December 2018

"इस साल" (ISS SAAL)





S.M.CREATIONS "MERI KALAM - DIL KI ZUBAA'N " PRESENTS….


TITLE : “इस साल” (ISS SAAL) 

https://youtu.be/CeLaq0QnO8U

WRITER: SHUBHAM SINGH CHAUHAN 

LABEL : S.M.CREATIONS "MERI KALAM - DIL KI ZUBAA'N " 

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"वक़्त और याद"(WAQT AUR YAAD)


माना अच्छे में ना सही , वक़्त बुरे में सही,
याद तो आज भी करती होगी वो मुझको।।

माना महफ़िल में ना सही,तन्हाइयों में ही सही,
ज़हन में आज भी रखती होगी वो मुझको।।

माना हक़ीक़त में ना सही, ख़्वाबों में ही सही,
कभी ना कभी देखती तो होगी वो मुझको।।

माना पाने को ना सही, भुलाने को ही सही,
सजदों  में याद तो करती होगी वो मुझको।।

माना जिस्म से नहीं, पर रूह से ही सही,
हरपल महसूस तो करती होगी वो मुझको।।

माना बहाने से ही सही , क़ब्र पर मेरी,
मिलने तो आती होगी "चौहान" वो मुझको ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।




Monday, 24 December 2018

"तेरा-मेरा इश्क़" (TERA MERA ISHQ)


तेरी यादों ने रात भर सोने ना दिया,
तेरे वादों नेें पल भर भी रोने ना दिया ।।

ना जाने क्या रिश्ता क्या एहसास है तुमसे,
हकीकत दूर, दूर ख्यालातों में भी होने ना दिया।।

कब तुम ज़िन्दगी और ज़िस्म में रूह बन गए,
तेरी चाहतों ने तन्हाइयों में खोने ना दिया ।।

सब मोती समेट कर रख लिए हमने इश्क़ के,
टूट जाने के डर से कभी माला में पिरोने ना दिया।।

हर दर्द हर ज़ख़्म को अपना बना लिया तूने,
क्यों कभी ये दर्द का एहसास मुझे होने ना दिया।।

जला रखा था तेरे इंतज़ार में जो मुहोब्बत का दिया,
हवाओं की गिरफ्त में हमनें कभी होने ना दिया।।

इश्क़ तेरा भी सच्चा था , इश्क़ मेरा भी सच्चा था,
मिल ना पाए पर कभी किसी और का होने ना दिया।।

चंदन तो ना बन सका कभी "चौहान" तेरी ख़ातिर,
मिट्टी की खुशबू था भीग कर भी अलग होने ना दिया।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।





Thursday, 20 December 2018

"कमी" (KAMI)


कोई वजह तो बता,
तेरी सज़ा क़बूल,
मेरा गुनाह तो बता,
मैंने तो अपना सब गवा लिया,
वो तो बता जो तूने मुझे खो के पा लिया,
कब तेरा मन मुझसे उब गया,
कब दरार आयी इस रिश्ते में,
कब ये कांच सा टूट गया,
प्यार तो मैंने भी किया था तुझसे,
माना प्यार तो उसने भी किया,
क्या कमी रह गयी फिर,
प्यार में मेरे वो कमी तो बता,
ये चाँद सितारे ज़मी आसमा ,
क्या कदमो में ला दिया उसने,
ज़रा मुझे भी तो बता,
वो शाम तो बता जो मेरी,
डुब के अब रात हो गयी ,
वो वादें तो याद कर ,
जो आज गुज़री बात हो गयी,
क्या मेरी तरहा कभी उसने भी,
हाथों से तेरे बालों को सहलाया,
क्या कभी उसने भी आँसू पोंछ तेरे,
तुझे सीने से लगाया,
क्या बिन बोले जान जाता है ,
वो भी तेरे दिल के जज़्बात,
क्या गुज़ार देता है पहरों,
तेरे इंतज़ार में तेरी यादों के साथ,
क्या वो भी तेरे हर गम को अपना समझता है,
क्या वो भी तेरे सपनो को हकीकत समझता है,
क्या वो भी खुश है तेरी बातों के ढंग से,
समझा लेता है क्या दिल को तेरे बदलते रंग से,
मुहोब्बत के किस ढंग से वो तेरा दिल बहलाता है,
साँसों से साँसें मिल जाती थी हमारी,
क्या वो भी इतना करीब आ जाता है,
जो तुझे रात भर पढ़ के सुनाता है,
वो गज़ल वो शायरी वो नज़्म तो सुना,
कमी क्या रह गयी थी मुहोब्बत में मेरी,
मुझे वो कमी तो बता।।
मुझसे दूरियां करीब उसके ला गयी,
या उसकी नज़दीकियां तुझे भा गयी,
दोष हालातों का था या मजबूरियां थी,
सच नही तो "चौहान" को झूठा बहना ही बता,
कमी क्या रह गयी थी मुहोब्बत में मेरी,
मुझे वो कमी तो बता।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।



Tuesday, 18 December 2018

"पागल लड़की" (PAGAL LADKI)


सहमी होगी ,ख़ामोश भी,शायद कहने से डरती होगी,
वो पागल लड़की आज भी मुझसे मुहोब्बत बेइंतहा करती होती।।

आज भी उसके ख्यालों में बस मेरा बसेरा होगा,
आज भी शायद उसकी रातें मेरी यादों में गुज़रती होंगी।।

मन तो आज भी करता होगा उसका मुझसे लिपट रोने का,
आज भी शायद घूंट आँसुओं के पी पी कर खुद में ही मरती होगी।।

आज भी शायद उस परवरदिगार से मुझे माँगती होगी,
आज भी शायद एक झलक पाने को रात-रात भर जगती होगी।।

आज भी वो शायद मेरे खामोशी से एहसास को भाँपती होगी,
आज भी शायद वो अतीत को साथ ले आज से भागती होगी।।

आज भी मेरी मुहोब्बत का दिया अपने दिल मे जगाती होगी,
लाश बना "चौहान" खुद को वो नज़र दुनिया को जिंदा आती होगी।।

आज भी शायद उसे इंतज़ार होगा मेरी कविताओं का,
आज भी वो छुपके से "मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ" पढ़ती होगी।।



शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।


Thursday, 13 December 2018

"शायद तुम नही जानती" (SHAYAD TUM NHI JAANTI)


शायद तुम नही जानती,
कोशिश तो कई दफा की ,
की बता दूँ तुम्हे,बता दूँ की,
ये दिल खफ़ा -खफ़ा सा क्यों है,
गर पहले जैसा ही है सब आज भी,
तो फिर ये दिल जुदा-जुदा सा क्यों है,
क्यों अब तेरे दीदार में करार आता है,
क्यों तेरी हर एक बात पर प्यार आता है,
क्यों फिर दिल दूरी सह ना पाता है,
दूर जाने की सोच कर भी क्यों घबराता है,
शायद तुम नही जानती,
तुम नही जानती के अब ,
तेरी उदासियां से उदास होता है,
हर वक़्त बस तेरे ही पास होता है,
तेरी आँखों मे आँसू सह ना पायेगा,
जानता हूँ तुझसे कभी कह ना पायेगा,
कुछ ख़त लिखे थे तुझे ,
लिखे ही रह गए ,
बारिश में उनके संग मेरे ,
जज़्बात भी बह गए,
दोस्ती कभी की नही तुझसे ,
पर दोस्त से बढ़ कर ही माना है तुझसे,
तुझ बिन अब जीना कैसा,
जिस्म में रूह सा जाना है तुझे,
शायद तुम नही जानती,
रोज़ रात आईने के सामने,
बातें भी करता है बैठकर,
पर खामोशी आ जाती है लबों पर,
हकीकत में तुझे सामने देखकर,
यूँ तो बातें तेरी चाँद तारों को बताता है,
कहीं खो ना दूँ तुम्हे ,
ये सोचकर ही रुक जाता है,
ना जाने कहाँ कहाँ सज़दे किये तेरी ख़ातिर,
जहाँ सर झुके "चौहान" बस तुझे मांगता है,
शायद तुम नही जानती।।


शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।


Tuesday, 11 December 2018

"मेरे बाद" (MERE BAAD)


मेरे बाद खुद ही में ढूंढोगी मुझे,
तेरे जिस्म में रूह बन जाऊंगा मैं।।

कहीं नजर ना आऊँगा तुम्हे मैं,
कुछ इस कदर गुम हो जाऊंगा मैं।।

आँखो से अश्क़ बनकर आऊंगा मैं,
तेरी आँखों से हि बह जाऊँगा मैं।।

दिल मे जज़्बात बनकर आऊंगा मैं,
होठों से बात बनकर निकल जाऊँगा मैं।।

हर रात ख़्वाब बनकर आऊंगा मैं,
सुबह नींद के साथ निकल जाऊँगा मैं।।

गम की धूप में साये सा साथ पाऊंगा मैं,
सुख की छांव में दूर निकल जाऊंगा मैं।।

हर किसी में नज़र फिर आऊँगा मैं,
छू कर तुझे हवा सा निकल जाऊँगा मैं।।

कैसे रखोगी "चौहान" को हाथों से रोक कर,
रेत बनकर तेरे हाथों से फिसल जाऊंगा मैं।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Saturday, 1 December 2018

"प्यार नही आता" (PYAR NHI AATA)


हाँ मुझे प्यार करना नही आता ,
तेरी बातों से इंकार करना नही आता।।

माना आज अकेला हूँ इस दुनिया के बाज़ार में,
क्या करूँ  रिश्तों में व्यापार करना नही आता।।

चाँद सितारे कदमो में लाने की बातें तो मैं भी कर लेता,
पर अपनी कही बातों से इंकार करना नहीं आता।।

आज अकेला हूँ सच्ची मुहोब्बत लेकर इस बाजार में,
क्या करूँ मुहोब्बत में जिस्मो वाला प्यार नही आता।।

मन तो मैं भी बहला देता तेरा चंद मीठी बातों से ,
क्या करूँ मुझे खुद ये दिखावे का संसार नही भाता।।

लिख तो "चौहान" भी देता तेरे इश्क़ में कोई ग़ज़ल,
क्या करूँ अहसासों को लफ़्ज़ों में पिरोना नही आता।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।




"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...