Monday, 3 July 2017

"एक-ख्याल " ( EK KHYAL)

आज कुछ लिखने को नहीं था ,
फिर भी कलम उठा के सोचता रहा ..
सोचता रहा रात भर के क्या लिखूं ???
फिर कहीं दूर दिल में झांक कर देखा ,
तो मुझे बस तेरा ख्याल आया ...
फिर सोचा के आज कुछ लिखूं तेरे बारे में,
पर ना जाने क्यों वो जज़्बात -ए-तहरीर थम गयी,
और सोचता रहा रात भर ,
तेरी बेपरवाही लिखूं या फिर तेरी बेवफाई लिखूं ,
बस इसी मजलिश में रात भर जागता रहा ,
और सोचता रहा के क्या लिखूं ???
जब आँखों को बंद करके देखा ,
तो तेरी सूरत नज़र आयी ...
फिर लिखने लगा जो मुझे हर कहीं ,
बस तेरी बेगैरत नज़र आयी ...
जब लिखना चाहा के क्यों अब तक मुझे तेरा इंतज़ार है ,
क्यों अब तक मेरे इस दिल को तुमसे प्यार है ..
बस इन्ही सोचो ने तुझे याद कर आँखों का सागर छलका दिया ,
कुछ लिख ना पाया "चौहान " उस रात ,
जो लिखा वो तेरी याद में बहे मेरे आंसुओं ने मिटा  दिया ...

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की ज़ुबाँ

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