आखिर तुम्हे मुझसे प्यार कैसे हो ।।
तेरे दिल को नहीं मेरी चाहत की दरकार,
आखिर तुम्हे मुझसे प्यार कैसे हो ।।
माना तलाशती है तेरी नज़रें किसी और को ,
उनको नहीं मेरे आने का इंतज़ार ,
आखिर तुम्हे मुझसे प्यार कैसे हो ।।
गम ही गम मिलते रहे है तुमसे ,
नहीं हुई तेरी कोई ख़ुशी मेरी तरफ़दार,
आखिर तुम्हे मुझसे प्यार कैसे हो ।।
क्या हुआ जो तुम रहते हो सोचों में ग़ुम,
मेरा आया न तुम्हे ख्याल एक भी बार ,
आखिर तुम्हे मुझसे प्यार कैसे हो ।।
नमाज़ें भी पढ़ी सजदे भी किये ,
तूने ही ना की हमें पाने दरक़ार,
आखिर तुम्हे मुझसे प्यार कैसे हो ।।
लिखते रहो चाहे उम्र भर "चौहान",
तुम्हारी कलम से हुआ ना मेरा ज़िक्र एक भी बार ,
आखिर तुम्हे मुझसे प्यार कैसे हो ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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