कैसे करेगी जुदा, मैं तेरी साँसों में शामिल हूँ,
बहता हूँ तेरे जिस्म में बनके लहू, तेरी रग रग से वाकिफ़ हूँ।।
परेशानियाँ है मुझसे तुझे लाखों सही,
देख गौर से तेरा सुकून भी मैं ही हूँ,
माना कभी लेना नही चाहती तेरी ज़ुबाँ मेरा नाम,
कैसे रखेगी खामोशियाँ मैं हर खामोशी में शामिल हूँ।।
माना पास नही आज रहती है मुझसे दूर दूर,
कब तक रहेगी अलग मैं तेरी कस्ती का साहिल हूँ,
नही मुहोब्बत मुझसे ना सही कोई गिला नही,
तुझे पल पल होते एहसास में शामिल हूँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
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