एक अंज़ाम लिख दे आज मेरी मुहोब्बत का ,
यूँ इंतज़ार में चलती साँसों का बोझ अब उठाया नहीं जाता ।
कोई हाल सुना दे जाके उसे मेरी बेबसी का ,
यूँ हँस हँस के अब दिल का दर्द छुपाया नहीं जाता ।।
मत बना किसी बेगाने को मेरा अपना ,
इन रिश्तों का क़र्ज़ मुझसे अब चुकाया नहीं जाता ।
थम जाने दे साँसें मिट जाने दे फ़साने ,
"चौहान" भर के लहू कलम में शब्द भर भी अब चलाया नहीं जाता ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ
यूँ इंतज़ार में चलती साँसों का बोझ अब उठाया नहीं जाता ।
कोई हाल सुना दे जाके उसे मेरी बेबसी का ,
यूँ हँस हँस के अब दिल का दर्द छुपाया नहीं जाता ।।
मत बना किसी बेगाने को मेरा अपना ,
इन रिश्तों का क़र्ज़ मुझसे अब चुकाया नहीं जाता ।
थम जाने दे साँसें मिट जाने दे फ़साने ,
"चौहान" भर के लहू कलम में शब्द भर भी अब चलाया नहीं जाता ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ
No comments:
Post a Comment