Wednesday, 21 June 2017

"चल अलविदा"(Chal Alwida)

चल अलविदा!!

अब कभी ये रात नही होगी,
रात भर अश्क़ों की बरसात नही होगी,
लो छोड़ दी आज हमने ज़िन्दगी अपनी,
अब कभी हमारी तुम्हारी मुलाकात नही होगी,

चल अलविदा!!

अब कोई अरमान नही होगा,
दिल मे तेरी यादों का तूफान नही होगा,
लो हार गया मैं और जीत गए तुम,
अब ज़िंदगी मे कोई और इम्तिहान नही होगा।।

चल अलविदा!!

तूने सहारा ना दिया लो डूब गया मैं,
अकेली ज़िन्दगी को जीते जीते ऊब गया है,
तुमको बनाते बनाते ज़िन्दगी अपनी,
देख खुद अपनी ज़िंदगी से रूठ गया मैं।।

चल अलविदा!!

अब कोई तुम्हे ना हरपल सताएगा,
अब कोई तुम्हें ना पल पल याद आएगा,
ले लगा लिया मौत को गले मैने अपने,
अब "चौहान" कभी ख्वाबों में भी नज़र न आएगा।।

चल अलविदा!!

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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