एक अरमान लिए बैठा हुं दिल में तुझे लेकर ,
थोड़ी सी चाहत मेरे लिए तू भी करले ।
बड़े नसीब से मिलते हैं मुक्कदर यहाँ ,
मुझे पाने की हसरत कभी तू भी करले ।।
ख्वाइशें नहीं हैं मेरी कुछ ज़्यादा तुमसे इस ज़िंदगी में,
हदों में रहकर ही सही थोड़ी मुहोब्बत तू भी करले ।
मंज़िलों की परवाह मत कर संग हुँ तेरे हर सफर में,
मुझे हमसफ़र बना के चलने की हसरत तू भी करले।।
लग ना पायेगा मोल चाहत का इस इश्क़ के बाजार में ,
मुहोब्बत में मुहोब्बत से बिक जाने की ज़ुर्रत तू भी करले।
पूजा है तुझे खुदा बना हर घड़ी " चौहान " ने ,
आज मुझे पाने को इबादत थोड़ी तू भी करले ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ
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