एक सवेरा फिर काली रात,
चंद लम्हे और तेरा साथ,
हर मौसम पतझड़ पर एक बरसात,
एक पल को सही हाथों में तेरा हाथ,
तेरे दर्द-ओ-गम में तेरा साथ,
छोटा हो सफर पर तु चले साथ,
दे मेरे दामन में तेरे दर्दों की सौंगात,
उम्रभर खामोशी पर तेरा ज़िक्र तेरी बात,
माँगा ही क्या था "चौहान",
पलभर की ज़िंदगी पल भर का साथ,
तेरे बिन, क्या ज़िंदगी, क्या मैं, क्या मेरे हालात।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
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