एक किस्सा बयाँ करूँगा ,
इश्क़ में हालातों का,
गुज़री तन्हा रातों का,
एक किस्सा बयाँ करूँगा ।।
तन्हा काली रातों का,
पल पल सताती तेरी यादों का,
जो होती थी कभी उन हसीन मुलाक़ातों का,
एक किस्सा बयाँ करूँगा ।।
खत में लिखे जज़्बातों का,
रात भर की जो उन बातों का,
तुझे लेकर जहन में उठते जज़बातों का,
एक किस्सा बयाँ करूँगा ।।
इश्क़ में मिली बेवफाईयों का,
पल पल बढ़ती रुसवाइयों का,
"चौहान" से की जो बेपरवाहियोँ का,
एक किस्सा बयाँ करूँगा ,
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।
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