Thursday, 22 June 2017

"आदत"(AADAT)

दर्द मिटता नही, ज़ख़्म भरता नही,
आदत ऐसी लगी तेरी, तुझबिन दिल धड़कता नही।।

चैन ना क़रार है ,अब दिल की तन्हा महफ़िल है,
कैसे जियूँ तुझबिन एक पल भी जीना मुश्किल है,
पल पल सदियों से ये तन्हा वक़्त भी अब गुज़रता नही,
दर्द मिटता नही........

तुझे भुला दूँ वो जज़्बात कहाँ से लाऊँ,
तेरा ज़िक्र ना हो जिसमें वो बात कहां से लाऊँ,
आँखो से चहरा तेरा "चौहान" एक पल भी हटता नही,
दर्द मिटता नही ......


शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

No comments:

Post a Comment

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...