आ एक बार फिर अजनबी हो जाएँ ,
भूल कर एक दूसरे को कहीं खो जाएँ ...
ना कभी तुम मिलना हमें दोबारा ,
ना कभी हम मिलेंगे तुम्हे कहीं ,
आ इस तन्हाई से दूर कहीं चैन से सो जाएँ,
आ एक बार फिर अजनबी हो जाएँ ।।
ना तुम रोना कभी हमें याद करके ,
ना हम रोयेंगे तुम्हे याद करके ,
आ एक दूजे से कुछ इस कदर मुलतवी हो जाएँ,
आ एक बार फिर अजनबी हो जाएँ ।।
ना तुम देखना कभी हमें ,
ना हम नज़र आएंगे कभी तुम्हे ,
"चौहान" आ कुछ इस कदर पर्दानशीं हो जाएँ,
आ एक बार फिर अजनबी हो जाएँ ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ
भूल कर एक दूसरे को कहीं खो जाएँ ...
ना कभी तुम मिलना हमें दोबारा ,
ना कभी हम मिलेंगे तुम्हे कहीं ,
आ इस तन्हाई से दूर कहीं चैन से सो जाएँ,
आ एक बार फिर अजनबी हो जाएँ ।।
ना तुम रोना कभी हमें याद करके ,
ना हम रोयेंगे तुम्हे याद करके ,
आ एक दूजे से कुछ इस कदर मुलतवी हो जाएँ,
आ एक बार फिर अजनबी हो जाएँ ।।
ना तुम देखना कभी हमें ,
ना हम नज़र आएंगे कभी तुम्हे ,
"चौहान" आ कुछ इस कदर पर्दानशीं हो जाएँ,
आ एक बार फिर अजनबी हो जाएँ ।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ
No comments:
Post a Comment