ये रिश्ते आम नहीं होते , माना इनके कुछ नाम नहीं होते ,
ये एक ऐसा सफर है ज़िंदगी का ,जिसमें हासिल मुक़ाम नहीं होते ।
माना के मिलकर भी नहीं मिल पाती मुहोब्बत इस फरेब की दुनिया में ,
क्योंकि आजकल सच्ची मुहब्बत करने वाले तमाम नहीं होते ।।
कौन समझाए दुनिया वालों को की मुहोब्बत मारे नहीं मरती ,
जो मरती तो मंदिरों में आज राधा- श्याम नहीं होते ।
माना के नहीं होती मुहोब्बत पूरी आज इस कलयुग में ,
क्योंकि आजकल कहीं राधा नहीं होती तो कहीं श्याम नहीं होते ।।
ढलती है मेहखानो में शाम इश्क़ के मरीज़ों की ,
वैद्य ,हक़ीम, दवाखानों में इस रोग के आराम नहीं होते।
मिल जाती है सच्ची मोहब्बत जिन्हें यहां "चौहान" ,
वो बस भगवान ही होते हैं यहां इंसान नहीं होते ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां !!
ये एक ऐसा सफर है ज़िंदगी का ,जिसमें हासिल मुक़ाम नहीं होते ।
माना के मिलकर भी नहीं मिल पाती मुहोब्बत इस फरेब की दुनिया में ,
क्योंकि आजकल सच्ची मुहब्बत करने वाले तमाम नहीं होते ।।
कौन समझाए दुनिया वालों को की मुहोब्बत मारे नहीं मरती ,
जो मरती तो मंदिरों में आज राधा- श्याम नहीं होते ।
माना के नहीं होती मुहोब्बत पूरी आज इस कलयुग में ,
क्योंकि आजकल कहीं राधा नहीं होती तो कहीं श्याम नहीं होते ।।
ढलती है मेहखानो में शाम इश्क़ के मरीज़ों की ,
वैद्य ,हक़ीम, दवाखानों में इस रोग के आराम नहीं होते।
मिल जाती है सच्ची मोहब्बत जिन्हें यहां "चौहान" ,
वो बस भगवान ही होते हैं यहां इंसान नहीं होते ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की जुबां !!
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