हर कहीं नज़र मुझे अब तू आती है ,
जो सांस लूँ तो तेरी खुशबू आती है ।
बिन तेरे बेचैन रहूँ , बेकरारी अब किस से कहूं ,
जो सोचूं पल भर को भी , ख्यालों में बस तू आती है ।।
इसे इश्क़ कहूं या मेरा दीवानापन कुछ समझ नहीं आता ,
देखूं जो परछाई अपनी तो नज़र तू आती है ।
ये ख्यालों की जुंबिश है या किस्मत की हेरा-फेरी ,
अब ज़िंदगी में ज़िंदगी से ज़्यादा ज़रूरी नज़र तू आती है ।।
पल भर भी जीना मुमकिन नहीं लगता अब बिन तेरे ,
"चौहान" को तो हर नज़म हर अल्फ़ाज़ों में नज़र तू आती है।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ
जो सांस लूँ तो तेरी खुशबू आती है ।
बिन तेरे बेचैन रहूँ , बेकरारी अब किस से कहूं ,
जो सोचूं पल भर को भी , ख्यालों में बस तू आती है ।।
इसे इश्क़ कहूं या मेरा दीवानापन कुछ समझ नहीं आता ,
देखूं जो परछाई अपनी तो नज़र तू आती है ।
ये ख्यालों की जुंबिश है या किस्मत की हेरा-फेरी ,
अब ज़िंदगी में ज़िंदगी से ज़्यादा ज़रूरी नज़र तू आती है ।।
पल भर भी जीना मुमकिन नहीं लगता अब बिन तेरे ,
"चौहान" को तो हर नज़म हर अल्फ़ाज़ों में नज़र तू आती है।।
शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ
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