Friday, 30 June 2017

"नज़र तू आती है " ( NAZAR TU AATI HAI)

हर कहीं नज़र मुझे अब तू आती है ,
जो सांस लूँ तो तेरी खुशबू आती है ।

बिन तेरे बेचैन रहूँ , बेकरारी अब किस से कहूं ,
जो सोचूं पल भर को भी , ख्यालों में बस तू आती है ।।

इसे इश्क़ कहूं या मेरा दीवानापन कुछ समझ नहीं आता ,
देखूं जो परछाई अपनी तो नज़र तू आती है ।

ये ख्यालों की जुंबिश है या किस्मत की हेरा-फेरी ,
अब ज़िंदगी में ज़िंदगी से ज़्यादा ज़रूरी नज़र तू आती है ।।

पल भर भी जीना मुमकिन नहीं लगता अब बिन तेरे ,
"चौहान" को तो हर नज़म हर अल्फ़ाज़ों में नज़र तू आती है।।

शुभम सिंह चौहान
मेरी कलम -  दिल की ज़ुबाँ

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