Sunday, 31 March 2019

"रात की कहानी" (RAAT KI KAHANI)


कोई दूरियों की वजह पूछे तो बेधड़क बताना,
ये इस रात की नही ये उस रात की कहानी है।।

ये सौंगात प्यार की , कोई प्यार की सौंगात नही,
साँसों से साँसे मिली थी कभी उसकी निशानी है।।

समझा था हमने के वो है हक में दिये की रौशनी के,
हवाओं संग देख,अनदेखा कर बैठे, हमारी नादानी है।।

कब किनारे नसीब हुए है बेड़ियों को समुंदर में,
इश्क़-ए-समुंदर में ये कहानी जानी पहचानी है।।

एक ना एक दिन अलग तो होना ही था "चौहान",
कब उसने कहा था के हर वादे हर बात निभानी है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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