वो कहती है मुझसे के कोई इश्क़ की कहानी लिखो,
अपनी हो या बेगानी पर मुहोब्बत-ए-रूहानी लिखो।।
वो जो ना जाने कितनी यादें कर गयी नाम हमारे,
कभी तो ढलती शामों की मुलाक़ात पुरानी लिखो।।
मत लिखना वो छुप-छुप कर रातों को मिलना हमारा,
चाँद को देखकर निकल गयी वो रात मस्तानी लिखो ।।
मत लिखना वो कसमे वादें मुहोब्बत के हमारे तुम्हारे,
जो अब तक संभाल रखी है वो प्रेम-निशानी लिखो।।
दबी बातों को कुरेद मत देना जज़्बातों में बह के,
वो नही कहती "चौहान" हमारी अधूरी कहनी लिखो।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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