Monday, 1 April 2019

"झूठी कहानियाँ" (JHUTHI KAHANIYAAN)


झूठी कहानियाँ है लोग सच्चे किरदार माँगते है,
जैसा जिसने सोचा मुझे सब वैसा ही जानते है।।

एक गाँठ है धागे की जो बाँध के रखती है सबको,
लोग है कि कीमत बस उन मोतियों की मानते है।।

वो मुहोब्बत भी क्या मुहोब्बत जो जतानी पड़े,
सच्चे एहसास कहाँ सहारा लफ़्ज़ों का माँगते है।।

साथ लहरों का भी था जो आज किनारे हो तुम,
अच्छे वक़्त में कहाँ उस खुदा को पहचानते है।।

कौन समझता है मज़बूरियां यहां किसी की,
लोग पेड़ की छावं में बैठ पत्थर उसी को मारते है।।

ये तो फ़ितरत हो गयी है आजकल जमाने की "चौहान",
एक वक्त तक ही एहमियत रिश्तों की मानते है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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