Saturday, 2 March 2019

"कहानी"(KAHANI)


किरदार बदले है कहानी वही है उसकी मुहोब्बत की,
हक़दार बदले है निशानी वही है उसकी मुहोब्बत की।।

क्या हुआ गर आज कोई और है वहाँ जहां कल तुम थे,
तरफ़दार बदले है रवानी वही है उसकी मुहोब्बत की।।

एक छलावा है सब चहरे की सिकन झूर्रियां उसके,
वक़्त बदला है जवानी वही है उसकी मुहोब्बत की।।

देख के रोशनी आफ़ताब की मोड़ लेते है मुँह चिरगों से,
जरूरत सही पर बेईमानी वही है उसकी मुहोब्बत की।।

आज भी लिफाफों में बंद पड़े है ख़त मुहोब्बत मेरे,
शर्म हया नही आदत ये पुरानी है उसकी मुहोब्बत की।।

तू खून से लिख "चौहान" या अश्क़ पानी से कोई फर्क नही,
नियत जमाने से जानी पहचानी है  उसकी मुहोब्बत की।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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