Monday, 16 April 2018

"मलाल" (MALAAL)


उसे अपनी ज़िद्द की फिक्र थी,
मुझे अपने प्यार का ख़्याल था।।

ना मिल सके हम फिर कभी,
वो हमारी मुहोब्बत का सवाल था।।

मेरे लिए वो ही मेरा सबकुछ था ,
उसके लिए सबकुछ एक मजाक था।।

उसे फिक्र अपनी मंज़िलों की थी ,
यहां मेरी ज़िंदगी का सवाल था।।

हम इंतज़ार में मर गए "चौहान",
जान के बेख़बर थे वो मुझे इसका मलाल था।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।



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