मेरा प्यार नही है तेरे वादों जैसा,
पल भर में बदले उन इरादों जैसा।।
गुस्ताख़ दिल है ये मानता नही,
तेरे सिवा किसी को जानता नही,
फीके पड़ जाए जो नही उन रंगों जैसा,
मेरा प्यार नही है तेरे वादों जैसा।।
रास्ते इश्क़ के युहीं नही मुश्किल बताते,
पागल नही वो जो उम्र भर इनपर चलते जाते,
छूट जाते है हाथ , अगर साथ हो तेरे जैसा,
मेरा प्यार नही है तेरे वादों जैसा।।
मरकर भी निभाउंगा उन वादों को ,
कैसे भुला दूँ दिल से तेरी यादों को,
ऐसे ही नही लिखता "चौहान" पैग़ाम वफ़ा का ,
मेरा प्यार नही है तेरे वादों जैसा।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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