जब मिलेंगे तुमसे तो ढेर सारी बातें करेंगे हम,
जी भर के तुझे देखेंगे तुझे आँखो में भर लेंगे हम।।
फिर से बैठेंगे रात भर तारों की छावं में ,
चाँद की चाँदनी में रात भर तुझको देखेंगे हम।।
सोओगे जब तुम मेरी बाँहों में आकर ,
तेरी नींद की हिफाज़त में रात भर जागेंगे हम।।
चलते थे जिन रास्तों पर कदम कदम संग मेरे,
उन्ही रास्तों पर तेरे हाथों को थाम के चलेंगे हम।।
पढ़ा करती थी जिनको पास बैठ के "चौहान" के तुम,
फिर वही "मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ" लिखेंगे हम।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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