Friday, 20 April 2018

"इश्क़" (ISHQ)


गमो में तेरा मुझे हँसना है इश्क़,
मेरे दर्द पर तेरा अश्क़ बहाना है इश्क़,
लबों पर आकर रुक जाती है जो ,
उन बातों को आंखों से कह जाना है इश्क़,
बिन बोले हाल-ए-दिल बताना है इश्क़,
एक झलक पाके मुस्कुराना है इश्क़,
किताबों में बंद कोई फ़साना है इश्क़,
कोई आने वाला मुहोब्बत-ए-ज़माना है इश्क़,
मेरे लबों से निकला तराना है इश्क़,
तेरा मुझमे समाना है इश्क़,
लोग लिखते रहे किस्से मुहोब्बत के ना जाने कितने ,
तेरा "चौहान" की ज़िंदगी मे आना है इश्क़ ।।


शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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