फिर वही दौर होने वाला है ,
खामोशियों का शोर होने वाला है ,
एक अरसे पहले जो आलम था ,
फिर उन्ही हालातों का जोर होने वाला है ,
शोरोगुल में भी तन्हाईयां होंगी ,
ज़िन्दगी से भी रुसवाईयाँ होंगी ,
दिल में कोई ना अरमान होगा ,
ख़्वाबों का आंगन वीरान होगा ,
राह तकती ये नज़र होंगी ,
नींदों से फिर बेख़बर होंगी,
दिन फिर यूँ वीरान होंगे ,
यादों के उठते तूफ़ान होंगे ,
कोई कहाँ रह पाएगा इस दिल मे ,
इस बस्ती के जब बंज़र मकान होंगे ,
इस दुनिया की भीड़ में खो जब हम जाएंगे,
तड़पोगे बहुत पर नज़र ना हम आएंगे,
दिल की सहरा में उठते जब तूफान होंगे,
जब वो मुहोबत के ताज शमशान होंगे,
हर सज़दे में जब मंगोंगे खुदा से हमें,
ऐसा फिर वो अंजाम-ए-मुहोब्बत होने वाला है,
इश्क़ की मदहोशी में मदहोश फिर "चौहान",
कहाँ तुझे उम्र भर तेरा होश होने वाला है ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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