तेरे बिना मुझे जीना नही मरना है ये मेरा फैसला है,
तू मेरे साथ होकर भी साथ नही बस यही गिला है ।।
फरियाद करनी आती है मुझे वही की है हरपल तुझसे ,
गम तो ये है की आप एक पल को भी नही सुनते।
अब दिल में जो उठ रहा है यूँ यादों का ज़लज़ला है,
तेरे बिना मुझे जीना नही मरना है ये मेरा फैसला है।।
रास्तों से लौट कर आना मेरी फितरत नही है ,
क्या हुआ अगर मंज़िल-ए-मुहोब्बत मेरी किस्मत में नही है,
तेरा दिया हर ज़ख़्म मेरी मुहोब्बत में वफा का सिला है ,
तेरे बिना मुझे जीना नही मरना है ये मेरा फैसला है।।
मेरी कलम में को कैसे बताऊ के ज़िक्र तेरा ना करे,
नादाँ-ए-दिल कहाँ से लाऊँ जो फिक्र तेरी ना करे ,
"चौहान" का तो बस तुझसे उम्र भर का दर्द-ओ-गम मिला है ,
तेरे बिना मुझे जीना नही मरना है ये मेरा फैसला है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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