Monday, 5 March 2018

"सोचता हूँ " (SOCHTA HOON)


हर रोज़ खुद से ये सवाल करता हूँ ,
क्यों तेरे लिए अपना जीना मुहाल करता हूँ ।।

सोच लेता हूँ अब जी लूँगा तेरे बिना,
न जाने फिर क्यों तुझे पाने को मरता हूँ।।

सोचता हूँ की छोड़ दूँ फिक्र करनी अब तेरी,
फिर ना जाने क्यों तेरी खातिर अपना बुरा हाल करता हूँ ।।

सोचता हूँ छोड़ दूँ अब तेरी यादों मे रहना ,
फिर न जाने क्यों जेहन मे तेरे ख़यालात रखता हूँ ।।

सोचता हूँ छोड़ दूँ बयान करना हाल-ए-दिल,
ना जाने क्यों "चौहान" बार बार तेरा नाम लिखता हूँ।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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