तेरे इश्क़ की रंगत में इस कदर रंग जाऊँ,
हो के फ़ना तेरे इश्क़ में , लाल चोला कर जाऊँ।।
हो फिक्र ना नींद खुल जाने की , ख्वाब सारे टूट जाने की,
तेरी बाँहों की आगोश में कुछ ऐसी नींद सो जाऊँ।।
छा जाए कितनी भी काली घटाएं, दिखा ले मौसम भी अपने तेवर,
तेरे प्यार के आसमाँ में आज बेख़ौफ़ उड़ता जाऊँ।।
ना फ़िक्र हो लहरों से टकराने की , ना तूफ़ाँ में ग़ुम जाने की,
तेरे आँखों के गहरे सागर से तेरे दिल में उतर जाऊँ।।
तुम हर्फ़ हो मैं बात बनु, तेरी कलम से निकले जज़्बात बनु,
मिटा ना सके जिसे कोई "चौहान" वो रूह बन तेरे जिस्म में उतर जाऊँ।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ

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