Tuesday, 31 March 2020

"झूठा है" (JHUTHA HAI)



ये इश्क़ मुहोब्बत अब हमे तो ना समझाओ,
इस बस्ती में तो हर किसी का दिल टूटा है।।

अब इस रिश्ते की बागडोर हम ही क्यूँ संभाले,
मैं अकेला थोड़ी हूँ जो पत्थरों से टकरा के टूटा है।।

तुम्हे हँसता मुस्कुराता मिलेगा यहाँ हर शक्श,
यकीन मत करना इस राह का हर शक्श झूठा है।।

याद रखना ये मुहोब्बत भी एक जुआ ज़नाब,
एक जीत के बाद यहाँ सबका सबकुछ लुटा है।।

चाँद में चहरे नज़र आते है जो आईने में मुस्कुराते है,
सब दिखावा है इस बस्ती का तो आईना भी झूठा है।।

मत लिख ये जज़्बात, ये फ़साने ,"चौहान",
मैंने सुना है तेरा लिखा हर किस्सा झूठा है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

6 comments:

  1. Nice Aosam likha hai 👌👌

    ReplyDelete
  2. चाँद में चहरे नज़र आते है जो आईने में मुस्कुराते है,
    सब दिखावा है इस बस्ती का तो आईना भी झूठा है very nice Bhai 💕

    ReplyDelete
  3. Kiski baate jhuti hai ... ?? Yaha kavi kya kehna chahta ? Kon jhutha hai kon sachha hai ... ?? Ye kaisa jhutha ye rishta hai ???

    ReplyDelete
  4. K bole h miahra ..tbiyt theek h teri 🤣🤣🤣

    ReplyDelete

"गुनाह"(GUNAAH)

गुनाह कितने है मेरे, मैं खुद नही जानता, मैं तेरा क्या हिसाब करूँ।। जवाब तो बात दूर की है, ये भी तो एक सवाल ही है, मैं तुझसे क्या सवाल क...