ओढ़ तिरंगा आ गए जो घर वापिस,
सजदे करता है दिल उन रूह महान को।।
रक्त से अपने सींच कर जिन्होंने,
बचाया भारत माँ की शान को।।
सजदे करता है दिल मेरा,
उन रूह महान को।।
ना देखा हाथों का वो चुड़ा,
ना माथे के लाल सिंदूर को,
छोड़ अकेले नन्ही सी जान को,
जो बचा गए मिट्टी के मान को,
सज़दे करता है दिल मेरा,
उन रूह महान को।।
जो माँ की ममता से बढ़कर,
माँ बाप का गुरुर बनकर,
जो चला देश की ढाल बनकर,
जो मिटा देश के मान पर,
सजदे करता है दिल,
उन रूह महान को।।
जो बाँध कफ़न लड़ गए,
चट्टानों से जो अड़ गए,
हर एक उस जवान को,
"चौहान" इस स्वाभिमान को,
सज़दे करता है दिल,
उन रूह महान को।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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