सच ही तो है ये अब हम बेगाने हो गए है,
ये इश्क़ ,मुहोब्बत सब फ़साने हो गए है।।
ना मेरा अब तुमपर कोई हक रहा,ना तेरा मुझपर,
अब हम किसी और शमा के परवाने हो गए है।।
अब कसमे वादे मत दिया करो निभा ना पाएंगे,
इश्क़ के इस दौर को गुज़रे अब जमाने हो गए है।।
एक वक्त था के हम अमानत ही नही जागीर थे तुम्हारी,
अब हम किसी मशहूर इमारत के बंद तहखाने हो गए है।।
भूल गए अब कैसे इश्क़ करले किसी से भी हम,
इस राह से गुजरे अब हमको कई जमाने हो गए है।।
सँभाल कर रखना जो भी लिखा था "चौहान" ने तेरे लिए,
मेरी तरफ से तेरे लिए आज इश्क़ के नज़राने हो गए है।।
शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

Aakh b na ROI h Dil b tere pyar m roya h 😆 nice lines Bhai 😘
ReplyDeleteThanks ♥️♥️♥️
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