Thursday, 11 April 2019

"नई शुरूआत" (NAYI SHURWAAT)


सारी कसमे भी खाई थी,
वो वादे भी किये थे मुहोब्बत के उसने,
"मैं बस तुम्हारी हूँ" ये दावे भी किये थे उसने,
दो दिन बात क्या नही हुई,
वो पाक मुहोब्बत का रिश्ता ही टूट गया,
ऐसा नही के झूठ कहा था उसने,
वो सारे वादे भी सच्चे थे उसके,
वो इरादे भी सच्चे थे उसके,
वो मुहोब्बत भी पाक थी उसकी,
बस आज इस कहानी के किरदार बदल गए,
गैर हो गए हम उनके हक़दार बदल गए,
जब मुहोब्बत का आगाज़ था,
तब उनका एक अलग ही अंदाज़ था,
तब उसे मुझे कोई खामी नज़र ना आती थी,
मेरी वो नादानियां वो शरारतें सब भाती थी,
फिर धीरे-धीरे वक़्त गुज़रता गया,
वो जैसा चाहती थी मैं वैसा नही था,
शायद उसे ये एहसास होने लगा,
अब उसकी मंज़िले बदल गयी थी,
मेरी मंज़िल रास्तों में ढल गयी थी,
अब वो सारी बातें उसे,
किसी और की अच्छी लग रही थी,
वो बालों से खेलना, बाहों में सिमटना,
अब उसे किसी और का अच्छा लग रहा था,
अब तो आलम इश्क़ का ये होगा "चौहान",
वही कसमे होंगी वही वादे होंगे,
वही बात मुलाकात होगी,
जब जान जाएंगे वो उनको ,
फिर एक नई शुरुआत होगी।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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