Friday, 19 April 2019

"किताब"(KITAAB)


ये मेरी ज़िंदगी की किताब है,
कुछ पन्ने है जो बहुत ख़ास है,
कुछ लम्हे हसीन है इसमें,
मासूम शरारत भरे ,
पर ना जाने क्यों "चौहान",
कुछ है जो आज भी बहुत उदास है।।
एक बचपन छुपा कर रखा है,
मासुमियत ,शरारतों भरा,
कुछ अनमोल यादें है ,
वो कहानियां है परियों की, राजे महाराजाओं की,
जो दादी नानी सुनाया करती थी,
एक आँगन था जो भरा रहता था खुशियों से,
जिसकी मुझे अब तलक तलाश है।।
एक दौर जवानी का भी है ,
मुहोब्बत की रवानी का भी है,
माँ के संस्कार भी है,
पापा से मिली नसीहतें भी है,
कुछ परायों ने अपना समझ के साथ निभाया,
कुछ अपने थे जो अब तक ख़िलाफ़ है,
दिल शुक्रगुज़ार है उनका,
जो वक़्त पर साथ छोड़ गए ,
और जो इस वक़्त में मेरे साथ है,
कुछ है जो अब यादों से भी परे है,
कुछ है जिनका मेरी हर साँस को आभास है,
टूट चुका हूँ कुछ को खोकर,
कुछ है जो मेरे जिस्म में आती जाती साँस है,
कुछ रिश्ते खून के नही पर ज़रूरी थे,
वो जो ना समझ पाए मुझे कभी,
उनको खोने से दिल थोड़ा उदास है,
एक चेहरा जो मैं ला ना सका इन तस्वीरों में,
कैसे समझाऊँ वो मेरी ज़िंदगी मे बहुत खास है,
सुना है बड़ी रहमत बरसती है खुदा तेरी तहरीरों से,
लिख दे उसे मेरे नसीब में जो मेरे दिल के बहुत पास है।।

शुभम् सिंह चौहान
मेरी कलम - दिल की ज़ुबाँ।।

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